How to made malt food and malt mixed drinks? In Hindi। Complete industry knowledge and process of making malt food and malt mixed drinks.

माल्ट फूड तथा माल्ट मिश्रित पेय की संपूर्ण उद्योग जानकारी एवं बनाने की प्रक्रिया
                                    




माल्ट फूड तो कार्नफ्लेक्स से भी अधिक पौष्टिक और स्वादिष्ट भोज्य पदार्थ है, और साथ ही छोटे-बड़े किसी भी स्तर पर किया जा सकता है इसका निर्माण । योरोप में तो माल्ट फूड को भी कार्नफ्लेक्स के समान ही दूध और चीनी मिलाकर प्रात: नाश्ते में खाते हैं । यद्यपि हमारे यहाँ इस रूप में माल्ट फूड का प्रयोग अधिक प्रचलन में नहीं, परन्तु इस पर आधारित पेय आधुनिक परिवारों की पहली पसन्द अवश्य हैँ । कोको मल्टिन, बोर्नबिटा आदि कई माल्ट मिश्रित पेय हमारे यहाँ अत्यन्त लोकप्रिय हैं, और पर्याप्त मात्रा में काफी लाभप्रद दरों पर आसानी से बिक भी रहे हैं । यहाँ हम विभिन्न अनाजों के माल्ट तैयार करने और उन्हें वांछित मात्रा में मिलाकर माल्ट फूड तैयार करने का स्टैण्डर्ड फॉर्मूला दे रहे हैँ । इस फार्मूले से तैयार माल्टफूड का प्रयोग दूध और चीनी मिलाकर कार्नफ्लेक्स के समान किया जाता हे । जब इसी फार्मूले में आप चीनी और कोको पाउडर की मात्रा दो से तीन गुना तक बढा लेगे, तब यही मल्टोवा, बोर्नविटा और कोको मालटीन जैसा पेय बन जाएगा ।


मुख्य आधार रचक

मक्का का स्टार्च तथा कार्नफलेक्स तो केवल हाइब्रीड नस्ल की मक्का द्वारा ही तैयार किए जाते हैं, परन्तु माल्ट कई अनाजों का तेयार किया जा सकता है । माल्ट स्वयं अपने आप में कोई वस्तु नहीं, बल्कि बिभिन्न अनाजों के अंकुरित दानों को सुखाकर पीसने के बाद जो आटा प्राप्त होता है उसे ही माल्ट कहा जाता है । हमारे यहाँ मूग, मोठ, चने, गेहूँ आदि को अंकुरित करके खाने की प्रथा प्राचीनकाल से चली आ रही है । इसी प्रकार के अंकुरित अनाजों ' का आटा ही माल्ट कहलाता है । अनाजों को जब पानी मे एक दिन भिगोने के बाद कुछ दिनों के लिए नम और गर्म वातावरण मे रख देते हैँ तब उनमें अंकुर फूट आता है । अंकुरण ही इस प्रक्रिया में अनाजों के दानों के अन्दर उपस्थित स्टार्च डैक्टट्रीन और माल्टोज के रूप में परिवर्तित हो जाता है, जो ग्लूकोज का मूल आधार है । यही कारण है कि इन दानों से बना भोजन शीघ्र सुपाच्य और पौष्टिक तो होता ही है, उसमे कार्बोहाइड्रेट्स तथा विभिन्न विटामिनों की मात्रा भी काफी बढ़ जाती है ।
 यूं तो सभी अनाजों का यह माल्ट बनाया जा सकता है, परन्तु माल्टफूड या ड्रिंक्स में मूंग मोठ जैसी दालों के  माल्ट नहीं मिलाए जाते । योरोप में माल्ट तैयार करने के लिए रागी नामक अनाज का प्रयोग किया जाता है, क्योंकि यह बहुत ही पौष्टिक अनाज है और वहाँ इतना अधिक उत्पन्न होता है कि पशुओं को खिलाने तक के लिए इसका प्रयोग होता है। इसके स्थान पर आप खिले हुए जो का प्रयोग भी माल तैयार करने के लिए कर सकते हैं। जहाँ तक व्यावहारिकता का प्रश्न है हमारे देश में मुख्य अनाज के रूप में गेहूँ का प्रयोग करते हैं और रागी तथा जौ को सहायक अनाजों के रूप में।
इस प्रयोजन के लिए संकर नस्लों का सामान्य गेहूं अच्छा नहीं रहता। परम्परागत पुराना देशी फार्म का गेहूँ ही इस कार्य के लिए उपयुक्त रहता है। आजकल मध्य प्रदेश के अथवा मालवा के गेहू के नाम से यह गेहूँ बाजार में मिलता है। सामान्य

गेहूँ की अपेक्षा डेढ़ से दोगुना दर पर यह गेहूँ खुले बाजार में सहज उपलब्ध है।
माल्ट आप केवल गेहूँ का तैयार करें अथवा गेहूँ, जौ और रागी के मिश्रित माल्ट का प्रयोग करें, स्वाद बढ़ाने के लिए इसके भार का चौथाई से एक तिहाई तक चने का माल्ट भी
इसमें प्रयोग किया जाएगा। सामान्य काले चनों का नहीं बल्कि सफेद रंग के मोटे काबली चनों
का प्रयोग माल्ट बनाने के लिए होता है। इसके साथ ही माल्ट के कुल भार के तीन चौथाई के लगभग मूंगफली का कम चिकनाई युक्त आटा भी माल्ट फूड में मिलाया जाता है। इस प्रयोजन के लिए आप छिलके रहित मूंगफली की खल को दरदरा-कूटकर हल्का सा भूनने के बाद बारीक
पीसकर भी प्रयोग कर सकते हैं, परन्तु इस रूप में इसके स्वाद और पौष्टिक गुणों में कुछ कमी
आ जाएगी। सबसे अच्छा तो यह रहता है कि अच्छी क्वालिटी की मूंगफलियाँ लेकर इन्हें कच्चा ही छिलवा लिया जाए अथवा छिले हुए मूंगफली के दाने लिए जाएँ। इन दानों को गर्म रेत में
हल्का सा भून लिया जाए और ठण्डा हो जाने पर छिलका उतारकर कोल्हू अथवा एक्सपेलर में इस प्रकार इनका तेल निकाला जाए कि आठ से दस प्रतिशत तक तेल इसकी खल में रह जाए। इस खल को बारीक पीसकर कम वसा के मूंगफली के आटे के रूप में रख लिया जाता है । जहां तक छोटे स्तर पर उत्पादन का प्रश्न है सबसे अच्छा यही रहेगा कि दस किलोग्राम छिलके रहित मूंगफली के खल में तीन किलोग्राम मूंगफली के दाने मिलाकर भून लिए जाएं और फिर इन्हें कम वसा के मूंगफली के आटे के रूप में ग्राइण्डर पर पीसकर रख लिया जाए।


अंकुरण या माल्ट बनाने की विधि (Malt प्रोसेसिंग)

सभी अनाजों के अंकुरण की विधि एवं प्रक्रिया तो एक ही है, परन्तु अनाज एवं मौसम के अनुरूप इस कार्य में 4 से 8 दिन तक का समय लगता है। चने को बारह घण्टे भिगाते हैं और तीसरे दिन इसमें अंकुरण निकल आते हैं। राई, जौ और गेहूँ को चौबीस से छत्तीस घण्टे तक भिगोया जाता है और गर्मियों में 4 तथा सर्दियों में आठ-दिन अंकुरण में लगते हैं। पर्याप्त बड़े बर्तन अथवा टैंक में अनाज को आधे से दो तिहाई क्षमता तक भरने के पश्चात उसमें सामान्य पानी भर देते हैं। एक टंकी में एक ही अनाज भरा जाता है। टंकी में अनाज डालने के पूर्व अच्छी तरह साफ तो जरूर कर लेते हैं बड़ी टंकी होने पर उसमें तीन-चार घंटे तक लगातार नल चलने देते हैं जिससे पानी बदलता रहे। बारह से छत्तीस घण्टे तक पानी भरी टंकी में अनाज रखने पर उसमें आर्द्रता पैतालीस प्रतिशत के लगभग हो जाती है। फर्श पर टाट बिछाकर उस  पर टंकी से अनाज निकाल कर ढाई-तीन सेण्टीमीटर ऊँची परत के रूप में बिछा देते हैं और ऊपर गीला टाट ढक देते हैं। कई टाट, बोरियाँ या कम्बल ढके जाते हैं और इन्हें हर समय गीला रखते हैं। अनाज का हर समय गीला बने रहना अनिवार्य है। चार से आठ दिन के भीतर इन दानों में अंकुर निकल आते हैं, तब इस अंकुरित अनाज को धूप में अथवा ट्रे में रखकर गर्म हवा के झोंकों द्वारा सुखा लिया जाता है। सूखे हुए इन दानों को छह पहलू के पाउडर मिक्सिंग ड्रम में अथवा हाथ से इतना लोट-पोट करते हैं कि उनके अंकुर अलग हो जाएं। अंकुर तो छानकर पशु-पालकों अथवा मुर्गीदाना उत्पादकों को बेच दिए जाते हैं और अनाज को आटे अथवा मैदा के समान पीसकर रख लेते हैं। सभी अनाजों के माल्ट इसी प्रकार तैयार करके अलग-अलग एअर टाइट ड्रमों में रख लिए जाते हैं।
यह छह पहलू का ड्रम एक सामान्य जुगाड़ है। इसका एक तख्ता मध्य भाग में इस प्रकार लगाया जाता है कि उसे वहां से हटाकर डम के अंदर वस्तुएं डाली और निकाली जा सके। अंकुरित सूखे हुए दाने इसमें डालकर घुमाने पर जहाँ उनके अंकुर टूटकर पृथक हो जाते हैं,वही आगे माल्ट फूड तैयार करते समय सभी रचक डालकर चंद मिनट घुमाने पर सभी पदार्थ आपस में मिल भी बहुत अच्छी तरह जाते हैं। यही कारण है कि छोटे स्तर पर तो एक ग्राइण्डर और यह एक ड्रम लेकर भी माल्ट फूड का निर्माण सुगमतापूर्वक किया जा सकता है।


गुण एवं स्वाद-वर्द्धक रचक (The Builders)

गेहूँ, जौ, गई और चने के माल्ट तथा मूंगफली के आटे के साथ ही पर्याप्त मात्रा में चीनी तथा दूध का सूखा पाउडर भी माल्ट फूड में मिलाया जाता है। इस के साथ ही चॉकलेट का सूखा रूप अर्थात कोको पाउडर भी माल्ट फूड में मिलाया जाता है। कोको पाउडर की प्रमुख भूमिका रंग और स्वाद को चॉकलेट से मिलता-जुलता बनाना है, तो दुग्ध पाउडर और चीनी की प्रमुख उपयोगिता इसे अधिक स्वादिष्ट एवं पौष्टिक बनाना है। इस मिश्रण में माल्ट होने के कारण प्रोटीन, ग्लूकोज़ तथा विटामिन तथा चीनी के कारण कार्बोहाइड काफी होते हैं।
मूंगफली का आटा और दुग्ध पाउडर पर्याप्त वसायुक्त भी इसे बना देते हैं, परन्तु कैल्शियम की मात्रा कम होती है। कैल्शियम की कमी को पूरा करने के लिए इसमें यथेष्ठ मात्रा में औषधियों के निर्माण में प्रयोग होने वाला वी.पी. ग्रेड का कैल्शियम कार्बोनेट (Calcium Carbonate B.P.Grade) भी मिलाया जाता है।

माल्टफूड का आधारभूत सूत्र (Basic Formula)



योरोप में जो माल्ट फूड सर्वाधिक लोकप्रिय है और कार्नफ्लेक्स के समान दूध में डालकर नाश्ते के समय भोजन के रूप में खाया जाता है उसका फार्मूला नीचे दिया जा रहा है। इस फार्मूले में आप क्षेत्र की मांग और स्थानीय स्वाद के अनुसार रचकों के अनुपात में थोड़ा-बहुत परिवर्तन भी कर सकते हैं-

  1.         रागी अथवा गेहूँ का माल्ट                  पांच किलोग्राम
  2.         कम वसा का मूंगफली का आटा          छह किलोग्राम
  3.         काबुली या बंगाली चने का माल्ट         ढाई किलोग्राम
  4.          दूध का पाउडर                               दो    किलोग्राम
  5.         पिसी हुई चीनी                                चार किलोग्राम
  6.         कोको पाउडर                                  पांच सौ ग्राम
  7.         बी.पी. ग्रेड का कैल्शियम कार्बोनेट       दो सौ ग्राम

माल्टीन पेय (Maltien Drinks)



उपरोक्त फार्मूले में दुग्धं पाउडर, कोको पाउडर तथा कैल्शियम कार्बोनेट की न्यूनतम मात्राएँ दी गई हैं। इसमें साढ़े सात किलोग्राम माल्ट के साथ छह किलोग्राम मूंगफली के कम
चिकनाई युक्त आटे का प्रयोग हुआ है। इसके विपरीत इसे माल्टोवा, कोको माल्टिन अथवा बानविटा जैसे पेय का रूप देते समय दस किलोग्राम माल्ट के साथ पांच-छह किलोग्राम मूंगफली के कम वसायुक्त आटे और इतनी ही मात्रा में सम्पूर्ण मलाईयुक्त दुग्ध पाउडर (Whole Milk powder) का प्रयोग करते हैं। इसमें लगभग दस किलोग्राम चीनी तथा ढाई से चार किलोग्राम के अंदर कोको पाउडर तो मिलाते ही हैं, अधिक मात्रा में कैल्शियम कार्बोनेट के साथ अन्य विटामिन और  खनिज लवण भी स्वल्प मात्रा में मिलाए जाते हैं। इस प्रकार एक अच्छा फॉर्मूला भी है-
  1. रागी  गेहूँ और जौ का मिश्रित माल्ट       10 किलो ग्राम
  2. काबुली अर्थात बंगाली चने का माल्ट।    3 किलो ग्राम
  3.  मूंगफली की भुनी खल का आटा           5 किलो ग्राम
  4. शुद्ध दूध का पाउडर                            6 किलो ग्राम
  5. कोको पाउडर (Coco Powder)          3 किलो ग्राम
  6.  पिसी हुई चीनी (Sugar)                      10 किलो ग्राम
  7. वी.पी. ग्रेड कैल्शियम कार्बोनेट                  500 ग्राम
  8.  विभिन्न विटामिन व खनिज।                    इच्छानुसार


पेय के रूप में सभी रचक सूखे एक स्थान पर मिलाने की बजाय इनको जमाने के बाद दरदरे पाउडर के रूप में पैक करना अधिक प्रचलन में है। इसके लिए सबसे पहले चीनी की
गाढी चाशनी तैयार करते हैं। दूध और कोको पाउडर को पानी में घोलकर छानने के बाद चाशनी में मिला दिया जाता है। खौलते हुए इस मिश्रण में शेष सभी वस्तुएँ डालकर हलवे की
भाति पकाने के बाद इसे ट्रओं में जमा दिया जाता है । ठण्डा होने के बाद बर्फियों के समान इसे काटकर ग्राइण्डर पर दरदरा पीस लेते हैं और काँच की शीशियों में पैक कर देते हैं।

विविध स्तरों पर प्लाण्ट तथा पूंजी निवेश



सैद्धान्तिक रूप से तो एक ग्राइण्डर लेकर पचास वर्ग मीटर स्थान में पचास-साठ हजार रुपए से भी माल्ट फूड का निर्माण प्रारम्भ किया जा सकता है। परन्तु जहाँ तक व्यावहारिकता का प्रश्न है काँच की शीशियों, टिन के छपे हुए डिब्बों और बड़े आकार के फैंसी पाउचों में ही इसे पैक किया जाता है और कई नगरों में अपना उत्पाद बेचना पड़ता है। अतः कई कुंटल
माल्टफूड अथवा माल्टेड ड्रिंक आपने तैयार करना ही होगा। इस स्तर पर एक ग्राइण्डर, एक पाउडर मिक्सिंग ड्रम तथा एक बालमिल लेकर आसानी से काम चलाया जा सकता है। 
अनाजों को भूनने के लिए आप वेफर्स सेंकने वाले ओवनों अथवा सामान्य बेकरी की भट्टी का भी प्रयोग कर सकते हैं, तो अनाजों को अंकुरण हेतु रखने के लिए बड़े आकार की ट्रेओं को अलमारियों में रखकर स्थान में पर्याप्त बचत कर सकते हैं। वैसे माल्ट फूड का निर्माण एक ऐसा उद्योग है जिसमें मशीनें और रैकें आदि सुविधा तो प्रदान करती हैं, परन्तु उद्योग की अनिवार्य आवश्यकता नहीं। यहाँ तक कि प्रारम्भ में ईंटों के टैंक बनवाकर और एक ग्राइण्डर लेकर भी आप माल्ट फूड का निर्माण प्रारम्भ कर सकते हैं। वैसे दो-ढाई लाख रुपए मशीनों पर लगाकर, दस-बारह लाख की कार्यकारी पूंजी से सफलतापूर्वक माल्ट फूड का निर्माण किया जा सकता है। 
माल्ट फूड और माल्टेड ड्रिंक्स की उपयोगिता कार्नफ्लेक्स के समान ही है। आधुनिक खुशहाल वर्ग ही इसका प्रयोग करता है। यही कारण है कि इनका पैकिंग, प्रचार और विक्री व्यवस्था सभी कुछ कार्नफ्लेक्स के समान ही है। शानदार पैकिंग, दूर-दूर तक माल भेजना और विक्री की विस्तृत व्यवस्था तथा भरपूर कार्यकारी पूंजी इस उद्योग की अनिवार्य आवश्यकताएं हैं, तो अधिकतम लाभ-प्रतिशत, साधारण प्लाण्ट तथा न्यूनतम प्रतिष्पर्धा सबसे बड़ी विशेषताएँ।




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