Bread kaise banta hai। ब्रेड बनाने का ऑटोमेटिक प्लांट।

ब्रेड बनाने का ऑटोमेटिक प्लांट

                           
आधुनिक उद्योगो में बड़े स्तर पर  ब्रेड का निर्माण ही शायद एकमात्र ऐसा उद्योग है जिसमे मालिक को करने के लिए तो कुछ होता ही नहीं, व्यवस्थित ऑफिस और मैनेजर आदि भी नही चाहिए । इनकी बिक्री के लिए प्रचार आदि की कोई परम्परा तो है ही नहीं, निर्माण प्रक्रिया और पैकिंग तथा बिक्री व्यवस्था भी इतनी सुगम है कि सामान्य श्रमिक ही सारा कार्य कर लेते हैं। इनके निर्माण में गेहूं की मैदा , खमीर, नमक, चीनी और सामान्य पानी जैसी सर्वसुलभ वस्तुओं का प्रयोग होता है । फार्मूले में कोई परिवर्तन नहीं किया जाता और सभी मशीनों का संचालन इतना सुगम है कि निरक्षर, अदक्ष श्रमिक ही सारा कार्य आसानी से कर लेते हैं । ब्रेड ताजी ही बिकती है। अत: तैयार होते ही प्लाण्ट से निश्चित दुकानों पर प्रतिदिन जाती रहती हैं । ब्रेड प्राय: नगद ही बेची जाती है, हफ्ते में सातों दिन उन्हीं दुकानों पर माल जाता है और भोज्य पदार्थ होने के कारण वर्ष के तीन सौ पैंसठ दिन माल सतत रूप से बिकता ही रहता है । यही कारण है कि इस उद्योग मे हानि की भी कोई संभावना नहीं ।

उद्योग की विशेषताएँ व सीमाएँ 

डबलरोटी अत्यन्त सस्ता और पौष्टिक भोजन है और यही कारण है कि सरकार अनेकं सुविधाएँ इस उद्योग को दे रही है । आसानी से इसे लगाने का लाइसेन्स और प्राथमिकता के आधार पर पावर का कनेक्शन मिल जाता है । इन पर एक्साइज डूयूटीं, उत्पादन कर और सेल्स टैक्स आदि भी नहीं और इन्कम टैक्स विभाग भी उद्योगपति को तंग नहीं करता । वर्ष मे तीन सौ पैंसठ दिन और तीन शिफ्ट में चौबीस घण्टे फैक्ट्री चलती रहती है, उत्पादन निरन्तर होता रहता है, परन्तु तैयार माल उसी दिन नगद बिक जाने के कारण अधिक कार्यकारी पूंजी भी नहीं चाहिए । परन्तु जहां इस उद्योग में इतने अधिक लाभ हैं, वही दो बडी कमियां भी हैँ । सबसे बडी कमी तो यह है कि इनका बिक्री मूल्य लगभग निश्चित ही रहता है, अत: मुनाफे की एक निश्चित सीमा है, बहुत अधिक अन्धा मुनाफा नहीं है इस उद्योग में । दूसरी प्रमुख सीमा यह है कि आप कुछ मशीने लेकर और कुछ कार्य सामान्य उपकरणों पर करके बेडों का निर्माण नहीं कर सकते, आप को पूरा प्लाण्ट ही लगाना पडेगा । अधिकांश उद्योगो में आप एक-एक करके समय-समय पर मशीने खरीदकर अपने प्लाण्ट को स्वचलित बना सकते हैं, परन्तु इस उद्योग में आपको प्रारम्भ में ही सभी मशीनें एक साथ लगानी पडेगी । इसके साथ ही प्रतिदिन तीनो शिपटों में  उत्पादन करना भी आपकी विवशता है । मैदा गूंथने में जहाँ एक घंटा लगता है, वहीँ दो-तीन घण्टे इसे फूलने में लगते हैं । इसके बाद आकार देने और पकाने तक की प्रक्रियाओं में तो करीब तीन घण्टे लगते ही हैं, दो घण्टे ठण्डा होने, स्लाइस के रूप में-काटने और पैक करने के लिए भी चाहिए । '

बिभिन्न क्षमताओं के प्लांट एवं लागत

स्लाइस के रूप  में कटी हुई ब्रेड भार के हिसाब से पैक की जाती है । हमारे देश मे चार सौ ग्राम और आठ सौ ग्राम के पैकिंग में ये स्लाइस ब्रेड बिकती है । पहले ये क्रमश: एक पाउण्ड और दो पाउण्ड के पैकिंग में बिकती थीं । इस उद्योग में परम्परा ही कुछ ऐसी पड़ गई है कि अभी भी मशीनों के माप और निर्माण प्रक्रिया में चार सौ ग्राम को पाउण्ड ही कहा जाता है । डबल रोटी के प्लाण्ट दस हजार पाउण्ड प्रति शिफ्ट से एक लाख पाउण्ड प्रति शिफ्ट तक के होते हैँ । हमारे देश में दस हजार पाउण्ड, तीस हजार पाउण्ड और पचास हजार पाउण्ड प्रति शिफ्ट के प्लाण्ट ही प्राय: उपलब्ध हैं । जहाँ तक चार सौ_ग्राम और आठ सौ ग्राम की डबल रोटियों के निर्माण का प्रश्न है सभी मशीनें एक ही होती हैँ, अन्तर मात्र सेंकने वाले साँचों में होता है । दस हजार पाउण्ड प्रति शिफ्ट के प्लाण्ट पर जहाँ पैंतीस-चालीस लाख के लगभग लागत आती है, वही साठ-पैंसठ लाख में तीस हजार पाउण्ड का और अस्सी से नब्बे लाख के मध्य पचास हजार पाउण्ड का प्लाण्ट लग जाता है । इसके साथ ही तीन सौ से आठ सौ वर्ग मीटर स्थान चाहिए, परन्तु भवन का बहुत मजबूत या भव्य होना अनिवार्य नहीं, सामान्य टिन शेड मेँ ही सारा काम चल जाता है।
आप जितनी क्षमता का प्लाण्ट लगाते हैँ, उससे तीन गुना उत्पादन करते हैँ, फिर भी अधिक कार्यकारी पूंजी इस उद्योग में नहीं चाहिए । हफ्ते भर के उत्पादन व्यय जितनी कार्यकारी
पूजी ही पर्याप्त रहती है । सभी कार्य सतत रूप से मशीने करती रहती हैं। अत: एक सुपरवाइजर, तीन-चार दक्ष श्रमिक और एक से डेढ़ दर्जन मजदूर या सामान्य श्रमिक ही पर्याप्त रहते हैं । इसके साथ ही माल सप्लाई करने के लिए कुछ छोटे और मध्यम आकार के ट्रक तथा अन्य वाहन भी चाहिए, जिनकी व्यवस्था ठेके पर भी की जा सकती है ।
यदि आपके यहाँ विद्युत की सप्लाई में व्यवधान आता रहता है, तब एक जनरेटर की व्यवस्था भी आपने करनी ही होगी, क्योंकि चन्द घण्टों का भी व्यवधान जहाँ गुथी हुई मैदा को
खराब कर सकता है, वहीँ भट्टी में भाप पर फूल रहा और हीटरों पर सिंक रहा सम्पूर्ण घान तो बेकार हो ही जाएगा ।

फ्लोर शिफ्टर

मैदा को छानने और उसकी नमी निकालकर उसे मिक्सर के पात्रों तक पहुँचाने वाला यह उपकरण 30-35 हजार रुपए का आता है । यह एक कनवेयर द्वारा संचालित होता है । जब
मैंदा को बोरियों में उलटकर निश्चित स्थान पर एक ढेर के रूप में डालकर कंप्रेसर चालू कर देते हैं तब वायु के दबाव से यह मैदा को खींचता, छानता और उसकी नमी सुखाकर उसमें सूखी, और ताजी हवा भरता रहता है । इस प्रकार मैदा की नमी और यदि रखे रहने की गंध है तो वह भी दूर हो जाती है । इसके अभाव में मैदा को हाथ से छानकर भी काम चलाया जा सकता है, परन्तु तब श्रम में काफी बढोत्तरी तो हो ही जाती है, मैदा मे नमी अथवा गंध होने पर उन्हें दूर करने के लिए उसे सुखाना भी पड़ेगा ।

सिंगल आर्म मिक्सर 

मिक्सर कई प्रकार के होते हैं, और विभिन्न उद्योगों मे रचकों को मिलाने के लिए प्रयोग किए जाते हैँ । परन्तु डबलरोटी की मैदा गूंथने के लिए उनमें से किसी भी मिक्सर का प्रयोग आप नहीं कर सकते । सभी मिक्सरों में पात्र के अन्दर मिश्रण गूंथने वाले ब्लेड लगे होते हैं, परन्तु ब्रेड की मैदा गूंथने के इन मिक्सरों में पात्र मिक्सर से जुडा हुआ नहीं होता, और न ही मिक्सर के ब्लेड मिश्रण को गूंथते अथवा घुमाते हैं । मैदा भरने का पात्र आकार में काफी बड़ा, परंतु थाली की आकृति का होता है और इसीलिए सैकडों लीटर क्षमता के इस पात्र को बाउल कहा जाता है । इन प्यालों को एक स्थान से दूसरे स्थान पर सुविधापूर्वक धकेलकर ले जाने के लिए इनके नीचे पहिए लगे होते हैँ और साथ ही एक गरारी भी इस प्रकार सेट होती है कि मिक्सर के साथ सेट कर देने के बाद बाउल अपने आधार पर निरन्तर गोलाई मे घूमता रहे। फ्लोर शिफ्टर के निकट वृहदाकार प्याले को लाकर सबसे पहले इसमें एक या दो बोरी मैदा भरी जाती है, और फिर इसे धकेलकर मिक्सर के प्रमुख भाग आर्म के पास ले जाकर उसके साथ सेट कर देते हैं । इस मिक्सर का सबसे प्रमुख भाग यह आर्म अर्थात भुजा ही है । यह आर्म ज़मीन पर मजबूती के साथ जुड़ा रहता है और दो विद्युत मोटरे इसमें लगी होती हैँ । एक मोटर तो मिश्रण के पात्र अर्थात बाउल को उसके आधार पर घुमाती रहती है और दूसरी मिक्सर के आर्म को मन्द गति से ऊपर उठाती और नीचे गिराती रहती है । आर्म की आकृति इस प्रकार की होती है कि मिश्रण लोटपोट होने के साथ ही बडी मात्रा में आर्म के साथ ही प्याले से काफी ऊपर तक उठ भी जाता है और इस प्रकार उसमें पर्याप्त वायु भरती रहती है । इस मिक्सर के निकट ही लगभग बीस हजार रुपए मूल्य का उपकरण वाटर बैचिंग मशीन भी लगाया जाता है । यह उपकरण बिजली के गीज़र के समान निर्धारित तापमान पर पानी गर्म करता है और यदि पानी में कोई गैस या रसायन मिलाना हो तो उसे मिलाता है तथा जितनी मात्रा सेट कर दी जाए उतना पानी पाइप के द्वारा मैदा भरे हुए बाउल में पहुंचा देता है । यहां बिशेष ध्यान रखने की बात यह है कि एक आर्म मिक्सर के साथ जहां पांच-छह बाउल अनिवार्य रूप से चाहिए, वहीं कई मिक्सरों के लिए एक वॉटर बैचिंग मशीन लगाकर भी काम चलाया जा सकता है ।
डबल रोटी के मिश्रण में खमीर, चीनी और नमक भी अल्प मात्राओं में मिलाया जाता है । इन तीनो ही चीजों को पानी में घोलकर मिश्रण में डाला जाता है । एक बाल्टी में खमीर और थोडी चीनी को गुनगुने पानी में डालकर रख देते हैं, जिससे खमीर क्रियाशील हो जाएं । अन्य बाल्टियों में पिसा हुआ सामान्य नमक व चीनी पानी में डालकर अलग-अलग रखते हैं। सबसे पहले आर्म मिक्सर के निकट निश्चित स्थान पर मैदा भरा हुआ बाउल लगा देने के बाद उसे घुमाने वाली मोटर और वाटर वैचिंग उपकरण से पानी डालना प्रारम्भ कर देते हैँ । थोड़ा पानी आ जाने पर मिक्सर के आर्म की मोटर को भी चालू कर देते हैँ और साथ ही पानी घुला खमीर और चीनी का घोल भी डाल दिया जाता  है। आधे-पौने घण्टे मिश्रण घोंटने के बाद यह बाउल खमीरीकरण की प्रक्रिया के लिए अलग हटाकर रख देते हैँ और मिक्सर में दूसरा प्याला लगा देते हैं । दो घण्टे में मिश्रण फूल जाता है तब इसमें नमक घुला हुआ पानी डालकर लगभग पन्द्रह मिनट दोबारा इस मिक्सर पर घोंटकर फूलने के लिए रख देते हैँ । एक-डेढ घण्टे में जब मिश्रण दोबारा फूल जाता है तब इस मिश्रण को डफ डिवाइडर के पात्र में उलट दिया जाता है ।

डफ डिवाइडर

 डफ डिवाइडर का कार्य मिश्रण को निश्चित भार के टुकडों में काटना है। इसके मिश्रण भरने का पात्र जमीन से लगभग ढाई-तीन मीटर की ऊँचाई पर लगा होता है । लिफ्ट द्वारा मिश्रण का प्याला पहुंचाने के पश्चात मिश्रण को डिवाइडर के टैंक में उलट दिया जाता है । डिवाइडर की जो भी मात्रा एक बार सेट कर दी जाती है, उतने ही वजन की लोइमां वह काट-काटकर कन्वेयर वेल्ट पर डालता रहता है । डिवाइडर में मिश्रण भरने के बाद आगे के सभी कार्य स्वचलित रूप से मशीनें ही करती हैं । डिवाइडर द्वारा काटा गया अनगढ़ पिंड कन्वेयर बेल्ट के माध्यम से स्वयं डफ़ राउन्डर तक जाता है । डफ राउन्डर उसे गोल करने के बाद कन्वेयर बेल्ट पर डाल देता है, जहाँ से बेल्ट उसे आगामी मशीन पर पहुंचा देती है । डफ डिवाइडर, डफ राउण्डर, इण्टर प्रूवर और डफ मोल्डर नामक ये चारों मशीने एक श्रृंखला में लगाई जाती हैँ और इस मध्य मिश्रण को हाथ से छुआ भी नहीं जाता, सभी प्रक्रियाएँ स्वयं होती रहती हैं । दस हजार पाउण्ड प्रति शिफ्ट क्षमता का छोटा सिंगल पॉकेट डफ डिवाइडर तो लगभग एक लाख रुपए में आ जाता है और छोटे डफ राउण्डर का मूल्य भी एक लाख रुपए के आसपास ही है । परन्तु सम्पूर्ण कन्वेयर बेल्ट सिस्टम पर तीन से पाँच लाख रुपए तक खर्च हो ही जाते हैं, जबकि तीस हजार पाउण्ड के प्लांट पर इससे दोगुनी लागत ही लगती है ।

डफ राउंडर

डफ डिवाइडर का कार्य निश्चित भार में लोई को काटना है, तो उसे गेंद के समान गोल रूप प्रदान करने का कार्य डफ राउण्डर करता है । राउण्डर की आकृति शंकु के आकार की नीचे से एकदम पतले और ऊपर पर्याप्त चौडे और लम्बे प्याले जैसी होती है । इस प्याले मेँ नीचे से ऊपर तक स्क्रू के समान चूडियाँ बनी होती हैं । यह प्याला एक निश्चित गति पर घूमता रहता है । डफ डिवायर से कटा हुआ पिण्ड कन्वेयर बेल्ट द्वारा आकर इस प्याले में गिरता है । निरन्तर घूमने के कारण प्याले की सतह पर बने पथ पर घूमता हुआ यह पिण्ड ऊपर आकर दूसरी कन्वेयर बेल्ट पर गिर जाता है । इस प्रक्रिया में गेंद के समान गोल हो जाता है यह पिण्ड । परन्तु गोल होने के लिए निरन्तर घूमने की इस प्रक्रिया में इसका फुलाव कुछ कम भी हो जाता है ।

इंटर प्रूवर

इण्टर प्रूवर कोई उपकरण नहीं, बल्कि पिण्ड को राउण्डर से मोल्डर तक ले जाने की विशिष्ट वाहक पट्टी है । गोल पिंडो को लम्बा करके ब्रेड का आकार देने के पूर्व लगभग पन्द्रह मिनट तक रखना अनिवार्य है । इस मशीन में कई पटरे लगे होते हैं और प्रत्येक पटरे में मिश्रण के पिण्ड रखने हेतु कई कटोरे जैसे लगे होते हैं । डफ राउण्डर से एक-एक पिण्ड निकलकर इण्टर प्रुवर के पटरे पर गिरता रहता है, जहाँ उन्हें एक विशिष्ट उपकरण निश्चित अंतर पर एक लाइन में सेट करता रहता है । लगभग प्रत्येके तीस सेकण्ड में इस पटरे में लगा धकेलने वाला राड इन पिंडो को इण्टर प्रूवर के घूमने वाले पटरे के कटोरों में खिसका देता है । ये सभी पटरे जिन्हें ट्रे कहते हैं, एक चैन से जुडे होते हैँ, जो इन्हे नीचे से ऊपर की ओऱ ले जाती है । एक निश्चित स्थान पर जाकर प्रत्येक ट्रे पिंडो को एक अन्य पटरे पर उलट देती है। वहाँ से एक-एक पिण्ड मोल्डर तक पहुंचता रहता है । दस हजार पौण्ड बेड प्रति शिफ्ट बनाने के लिए पचास ट्रे लगा हुआ इण्टर प्रूवर पर्याप्त रहता है जिसका मूल्य पौने दो लाख रुपए  के लगभग है, जबकि तीस हजार पाउण्ड की क्षमता के इस प्रूवर का मूल्य चार लाख रुपए के लगभग है ।

डफ मोल्डर

स्लाइसड ब्रेड की स्लाइस तो सिंकने के बाद काटी जाती हैँ, परन्तु सेंकने के पूर्व इस गोल मिश्रण को चपटा और लम्बा रूप देना तो आवश्यक है ही । यह कार्य डफ मोल्डर करता है । डफ मोल्डर नामक यह मशीन आकार में तो काफी बडी होती है, परन्तु इसका मूल्य एक से डेढ ताख रुपए के मध्य ही है । इण्टर प्रूवर से कन्वेयर बेल्ट पर चलता हुआ पिण्ड इस मशीन की वाहक पट्टी पर आकर गिरता है । वाहक पट्टी पर जब यह पिण्ड आगे बढ़ रहा होता है तब हलके ऊपर लगे रोलर इसे लम्बा और चपटा रूप दे देते हैं । यहाँ से यह मिश्रण एक अत्यन्त मन्द गति से घूमने वाली बेल्ट पर चलकर फाइनल प्रूवर के मुख के पास तक पहुंचता रहता है ।
फाइनल प्रूवर के पास एक अन्य कन्वेयर बेल्ट पर ब्रेड के खाली साचे एक ओऱ से आते रहते हैं,  और आगे फाइनल प्रूवर की मुंह की ओर बढते रहते हैँ । यहां पर मिश्रण की एक-एक पट्टी प्रत्येक सांचे में रखी जाती है । छोटे यूनिटों में प्रत्येक लोई एक पाउण्ड (चार सौ ग्राम) की ब्रेड के हिसाब से बनाई जाती है । अत: आठ सौ ग्राम की ब्रेड के लिए दो पट्रिटयों को आपस में हल्का सा लपेटकर सांचों में डालते हैं । दस हजार और तीस हजार पाउण्ड क्षमता के यूनिटों में लोइयों को साचों में डालने का कार्य प्राय: हाथ से किया जाता है, तो मॉडर्न और ब्रिटेनिया ब्रेड जैसे बड़े यूनिटों में इसके लिए भी स्वचलित मशीन होती है ।

फाइनल प्रूवर

सामान्य डबलरोटियों की अपेक्षा स्लाइड्स ब्रेड के अधिक मुलायम, रंग मे साफ औऱ अधिक फुलावयुक्त होने का एकमात्र कारण यही है कि इन्हें आग में सेकने के पूर्व भाप में भी पकाया जाता है । भाप के माध्यम से ब्रेडों को पकाने का उद्देश्य वास्तव मे उन्हें सेंकना नहीं, बल्कि अधिकतम संभव सीमा तक फुलाना है । यही कारण है कि ब्रेड सेंकने के ओवन या भट्टी से पूरी तरह मिलता-जुलता होने के बावजूद इसे भट्ठी नहीं, फाइनल प्रूवर कहा जाता है । इसमें सीधा ताप नही दिया जाता, बल्कि दो-दो मिनट के अन्तराल से वाष्प प्रवाहित होती रहती है । इसमें तापमान और आर्द्रता नियन्त्रण की विशेष व्यवस्था रहती है । इसके अन्दर तापमान चालीस डिग्री सेण्टीग्रेड अर्थात एक सौ अंश फारेनहाइट तथा आर्द्रता अस्सी से पिच्चासी प्रतिशत रखी जाती है । मिश्रण का सांचा इसमे लगभग एक घण्टे घूमता रहता है । इस समय मे मिश्रण तीन गुना फूलकर पूरे सांचे को भर लेता है, परन्तु वाष्प के सम्पर्क में रहने के कारण मिश्रण की ऊपरी सतह भी मध्यवर्ती भाग की तरह नमीयुक्त और मुलायम बनी रहती है । दस हजार पाउण्ड क्षमता के फाइनल प्रूवर का मूल्य छह लाख रुपये के लगभग है, तो तीस हजार पाउण्ड क्षमता के फाइनल प्रूवर की कीमत बारह-तेरह ताख रुपए । ब्रेड पकाने की भट्ठियों अर्थात् ओवनों का मूल्य भी लगभग इतना ही होता है और इन दोनों की बाहरी एवं अन्दरुनी बनावटों एवं कार्य प्रणाली में भी अधिक अन्तर नहीं ।

भटूटी अर्थात ओवन

फाइनल प्रूवर के समान ही स्वचलित प्लाण्ट मेँ भट्ठी भी लोहे की मोटी चादर की बनी होती है । इन दोनों की आकृतियां भी कमरे जैसी होती हैं परन्तु प्रूवर में एक द्वार होता है तो ओवन में दो द्वार होते हैँ और आकार फाइनल प्रूवर से कुछ बड़ा । एक द्वार तो फाइनल प्रूवर के द्वार के निकट होता है जिसमें होकर इसकी पट्टीयों पर प्रूवर से निकाले हुए सांचे रखे जाते हैं । दूसरा द्वार पिछली तरफ़ होता है जहाँ से सिंकी हुई ब्रेड के सांचे बाहर निकाले जाते हैँ। सांचों से ब्रेड निकालने के बाद ब्रेड को तो लोहे के तारों से बनी रेकौं  में रखते जाते हैं और खाली सांचे कन्वेयर वेल्ट पर रख देते हैं । वहां से वे फाइनल प्रूवर के पास पुन: मिश्रण भरने के लिए पहुंचते रहते हैं । जब ओवन में लगे पटरे पर डबलरोटी के सांचे रख दिए जाते हैं तब वह पटरा तो स्वयं ऊपर की ओर चला ही जाता है, प्रत्येक पटरे पर लगा टिन की चादर का ढक्कन सांचे को ढक भी लेता है । यही कारण है कि फूलकर डबलरोटी बेडौल तो हो नहीं पाती,
भीषण ताप के बावजूद उसकी ऊपरी सतह जलती भी नहीं । ब्रेड के माप और तापमान के अनुसार ब्रेड को सिंकने मेँ आधे से एक घण्टे तक समय लग जाता है और यही कारण है कि प्रति शिफ्ट क्षमता के एक चौथाई सांचे तो आपने बनवाने ही होंगे ।

ठंडा करने का कमरा

ब्रेड का आकार ईंट से भी बड़ा होता है, अत: सामान्य रूप से ठण्डा होने में इसे घण्टों लग जाएंगे । यही नहीं, यदि इन्हें खुले स्थान में ठण्डा होने के लिए रख देंगे तब वातावरण से नमी सोखकर ये सीलनयुक्त, बेस्वाद और प्रदूषित भी हो जाएँगे । यही कारण है कि इस कार्य के लिए विशेष एअर कण्डीशन्ड कमरा बनवाया जाता है । इस कमरे में छत के निकट गर्म हवा निकालने के लिए कई एक़जास्ट फैंन तो लगाए ही जाते हैँ, साथ ही एकदम सूखी और शीतल वायु प्रवाहित करने हेतु बिशेष व्यवस्था भी की जाती है । कूलिंग ट्युनल और एअर कण्डी शिलिंग संयत्र सहित इस कमरे के निर्माण पर भी लगभग पाँच लाख रुपए की लागत तो आ ही जाती है ।

 कटिंग तथा पैकिंग 

ब्रेड की पैर्किग का यूनिट ही एकमात्र ऐसा विभाग है जिसमेँ दस-पन्द्रह हजार रुपए की सामान्य जुगाड से लेकर लाखों रुपए तक की स्वचलित मशीनें आप अपनी क्षमता और आवश्यकता के अनुरूप लगा सकते हैँ । आजकल तो ब्रेडे पोलीथीन की छपी हुई थैलियों मेँ भी पैक की जाती हैं, अत: काटने के बाद हाथ से थैली में रखकर सामान्य हीटिंग एलीमेन्ट लगी टिन की चादर से मुँह जोडकर भी आसानी से काम चलाया जा सकता है । इन्हें काटने के लिए अनेक ब्लेड लगे विशिष्ट कटर का उपयोग किया जाता है । जहाँ तक मोम चढे हुए कागज के रेपरों में ब्रेड लपेटने का प्रश्न है इसकी पूर्ण आटोमेटिक मशीन भी आती है, जिसमेँ ब्रेड को काटने, रेपर में लपेटने और दोनों तरफ कागज मोड़कर हीटिंग एलीमेण्ट युक्त टिन की चादर से उसे जोडने का कार्य मशीन स्वयं करती रहती है ।

मैदा तथा अन्य कच्चे माल का चयन

 ब्रेड का मुख्य कच्चामाल तो मैदा ही है, जबकि अल्प मात्रा में सोयाबीन का बारीक आटा, चीनी, नमक, खमीर या यीस्ट और माल्ट भी इनके निर्माण में प्रयुक्त होता है । मैदा हाई ग्लूटन टाइप अच्छी रहती है, जबकि खमीर चीनी मिलों-द्वारा निर्मित । सबसे अच्छी मैदा वह रहती है, जिसमें विविध रचक कम से कम निम्न अनुपात में हों-

  1.        कार्बोहाइड्रेट्स          68%
  2.        प्रोटीन                     27.5 % 
  3.        वसा या फैट             1 .0 %
  4.        रेशे या फाइबर          0.4 ०/०
  5.         एश                       0.3 %


तैयार डबलरोटी का विश्लेषण व फार्मूला 

 अच्छी ब्रेड वही मानी जाती है जिसमें बिभिन्न रचक व पौष्टिक तत्व इस अथवा इससे मिलते-जुलते अनुपात में हों

  1.     पानी या नमी              45.0०/०
  2.    कार्बोहाइड्रेट्स             44.8०/०
  3.    प्रोटीन                        6.3 %
  4.      सैलूलोज                  1 .5 % 
  5.    वसा या चिकनाई          1.2% 
  6.    राख या एश                1 .2%


इस प्रकार की अच्छी बेड तैयार करने का पूर्ण सन्तुलित और सर्वाधिक लोकप्रिय फार्मूला इस प्रकार है-

  1.          हाई ग्लूटन टाइप गेहूँ की मैदा     100 किलोग्राम
  2.         सोयाबीन का बारीक आटा          छह किलोग्राम 
  3.         नमक                                     1.8 किलोग्राम
  4.         चीनी                                      2.5 किलोग्राम 
  5.        खमीर या यीस्ट                         एक किलोग्राम 
  6.        रिफाइंड तेल                            एक किलोग्राम  
  7.        गुनगुना गर्म पानी                      55 लीटर

तेल या चिकनाई को मिश्रण में नहीं मिलाया जाता, वह तो प्रत्येक लोई पर चन्द बूंद डिवाइडर से काटने के बाद टपकाया जाता है । सूखे दूध का पाउडर, अंडों की सफेदी, अधिक मात्रा में सोयाबीन का आटा आदि मिलाकर अनेक निर्माता अधिक पौष्टिक और विशिष्ट स्वादिष्ट ब्रेड भी बनाते हैं, परन्तु उनकी अधिक मांग नहीं । वेसे प्रत्येक निर्माता अपने विशिष्ट फार्मूले का प्रयोग करता है, परन्तु सबका मूल आधार लगभग उपरोक्त ही है ।

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