How to make biscuits in Hindi? Biscuit making plant.

                              ब्रेड और बिस्कुट दोनों का ही निर्माण बेकरी इंडस्ट्री के अन्तर्गत आता है और बहुत छोटे स्तर पर डबलरोटियां बनाने वाले व्यक्ति विभिन्न प्रकार के बिस्कुट भी तैयार कर ही लेते हैँ । परन्तु जहाँ तक आटोमेटिक प्लाण्ट लगाकर बड़े स्तर पर बिस्कूटों के निर्माण का प्रश्न है ये दोनों उद्योग न केवल पूर्णत: पृथक-पृथक हैं, बल्कि इनमें एक दूसरे के विरोधी की सीमा तक अन्तर है। ब्रेडों के निर्माण के विपरीत बिस्कुट तैयार करने के लिए मात्र दो-तीन मशीने ही चाहिए । लगभग दस लाख रुपए में बिस्कुट बनाने का पूरा प्लाण्ट लग जाता है, परन्तु दो-तीन माह के उत्पादन व्यय जितनी कार्यकारी पूंजी तो चाहिए ही, शानदार पैकिंग और प्रचार पर जितना -खर्च किया जाए उतना ही अधिक लाभ प्राप्त किया जा सकता है इस उद्योग में । ब्रेडों का विज्ञापन तो आपने शायद ही कभी कहीं देखा हो, परन्तु शक्तिमान जैसे धारावाहिक का प्रायोजक ब्रिटानिया ग्लूकोज बिस्कुट ही था ।

 प्लाण्ट, मशीने व पूंजी निवेश

ब्रेड निर्माण मे काम आने वाली कोई भी मशीन तो बिस्कुटों के निर्माण में काम आ ही नहीं सकती, इसके लिए मिक्सर और भट्टी या ओवन भी एकदम अलग प्रकार का चाहिए । इस उद्योग मे उत्पादन के लिए तो लगभग दो-सौ वर्ग मीटर स्थान ही पर्याप्त रहता है, परन्तु तैयार बिस्कूटों को रखने के लिए पर्याप्त स्थान अवश्य चाहिए । जहाँ तक मिश्रण मिलाने के लिए मिक्सर  का प्रश्न है वह आवश्यक्ता और क्षमता के अनुरूप दस हजार से लाख रूपए के मध्य खरीदा जा सकता है । मिश्रण को बिस्कुट का आकार देने वाली मशीन तीन से पाँच लाख रुपए के मध्य आ जाती है और एक ही मशीन पर रोलर्स अदल-बदलकर कई प्रकार के बिस्कुट तैयार किए जा सकते हैं । बिस्कुट सेंकने का ओवन भी 5-6 लाख रुपए मे आ जाता है, अत: मशीनों पर तो आठ से बारह लाख रुपए तक ही खर्च होते हैं । जहाँ तक कार्यकारी पूंजी का प्रश्न हैं, वह पूरी तरह इस बात पर निर्भर करेगी कि आप कितने प्रकार के बिस्कुट का निर्माण करते हैँ, उनका कैसा पैकिंग करते हैं और तैयार माल को कितने समय मे और किन शर्तों पर बेच पाते हैं।

मिक्सर का चयन

बिस्कूर्टों का मिश्रण काफी कड़ा गूथा जाता है और ये डबलरोटी या ब्रेड जितने गीले भी नहीँ होते । सबसे बड़ा अन्तर तो यह है कि इनके मिश्रण में खमीर या यीस्ट का प्रयोग तो होता ही नहीं, मिश्रण को गूंथने के बाद शीघातिशीघ्र उसे आकार देकर सेंक लेना भी अनिवार्य है । मिश्रण को गूंथने के लिए आप प्रिंटिंग इंक्स और पेण्ट तैयार करने के काम आने वाले एज रनर से लेकर प्लेटन टाइप मिक्सर तक किसी भी मिक्सर का प्रयोग कर सकते हैं । वेसे इस कार्य के लिए सबसे अच्छा रहता है, हेवी डूयूटी क्लिपिंग टाइप जनरल पर्पज मिक्सर ।
इस मिक्सर को सामान्य कारीगर डफ मिक्सर भी कहते हैँ । सूखे पाउडरों, पानी के समान तरल घोलों और पतले से लेकर गाढे-से-गाढे पेस्टों को घोंटने-मिलाने में समान रूप से समर्थ है यह मिक्सर । इसमे लगे पात्र को दोनों ओर कितना ही झुकाया जा सकता है, अत: तैयार डफ निकालने में भी आसानी रहती है । अन्य मिक्सरों के विपरीत इसमें ब्लेडों का जोडा जमीन के समान्तर जंड़ा होता हे अत: जब मिक्सर के ब्लेड इसके पात्र में घूमते हैं तब नीचे के रचक ऊपर तो आते ही हैं  पूर्ण दबाव के साथ ऊपर के रचक तल की ओर भी जाते हैं । यही कारण है कि मैदा और अन्य सूखे रचक डालकर दो-तीन मिनट मिक्सर चलाने पर ही सभी पदार्थ परस्पर अच्छी तरह मिल जाते हैं । फिर इसमें पानी तथा अन्य तरल डालकर पन्द्रह बीस मिनट मिक्सर चलाया जाता है और बिस्कुट के लिए मिश्रण तैयार हो जाता है । पाँच से छह
किलोग्राम क्षमता के हाथ से चलाए जाने वाले पिक्सर से लेकर विद्युत मोटर द्वारा संचालित सैकडों किलोग्राम क्षमता तक के ये क्लिपिंग टाइप मिक्सर अनेक निर्माता बना रहे हैं, क्योंकि कई उद्योगों में यह मिक्सर सामान रूप से काम आते हैँ।

बिस्कुट बनाने की स्वचलित मशीन

यह एक ही मशीन तैयार मिश्रण को रोटी के समान शीट के रूप में बेलने, उन्हें काटकर निश्चित आकार देने और ओवन तक पहुंचाने का कार्य स्वयं करती रहती है । कारीगरों द्वारा कुछ करना तो दूर बिस्कुट सिंककर ठण्डे होने तक उन्हे छूना भी नहीं पडता, सभी कार्य एक श्रृंखला के रूप मे स्वयं ही होते रहते हैं । कारीगर मिक्सर मे से गुंथा हुआ मिश्रण निकालकर इस मशीन की टंकी में भर देता है । मशीन के पात्र में बने निकास द्वार से यह मिश्रण धारा-प्रबाह रूप से निकलकर आगे बढता रहता है । रोलिंग मशीन के रोलर्स उसे निश्चित मोटाई में बेलकर एक शीट के रूप में आगे बढाते रहते हैँ । मशीन में लगी कन्वेयर बेल्ट पर यह शीट आगे बढकर बिस्कूटों को आकार देने वाले रोलर्स तक पहुँचती रहती है और बिस्कुट कटकर दूसरी कन्वेयर बेल्ट पर गिरते ऱहते हैं । यह कन्वेयर बेल्ट बिस्कुट सेकने के ओवन की कन्वेयर बेल्ट से इस प्रकार संयुक्त की जाती है कि बिस्कुट स्वयं ओवन के अन्दर सिंकने के लिए जाते रहते हैं । बिस्कूटों के पीछे की तरफ आप जाली जैसे जो निशान देखते हैँ वे वास्तव में इस कन्वेयर बेल्ट के तारों के ही होते हैं ।
बिस्कूट सेकने का ओवन यद्यपि ब्रेड के ओवन से कई गुना लम्बा होता है, परन्तु इसकी संरचना काफी सरल है । कई आकारों में ये ओवन तैयार करवाए जा सकते हैं, 'वेसे बडे प्लांटो में लगभग पचास मीटर लम्बा ओवन लगाया जाता है । मुख्य रूप से इस ओवन के दो भाग होते हैं। तीन मीटर लम्बा प्रथम भाग भट्टी के रूप में होता है जिसमें कई हीटर तो जलते ही रहते हैं, गर्म हवा को सम्पूर्ण ओवन में घुमाने की विशेष व्यवस्था भी होती है । इससे जुडा हुआ कूलिंग चेम्बर होता है जो बारह से पन्द्रह मीटर लम्बा होता है । इस चेम्बर में तापमान बहुत अधिक ठण्डा रखा जाता है और एकदम सूखी और ठण्डी हवा इसमे प्रवाहित होती रहती तथा हवा बाहर निकालने की व्यवस्था भी इस भाग में रहती है । ओवन मे एक सिरे से दूसरे सिरे तक घूमने वाली लोहे के तारों की जाली लगी होती है। यह जाली इस प्रकार घूमती रहती है कि बिस्कुट पहले तो भट्टी वाले भाग में गुजरते हैँ और फिर कूलिंग चेम्बर मे पहुंचते हैं । अन्त में यह कन्वेयर बेल्ट ओवन के दूसरे सिरे से बाहर निकल जाती है, जहाँ बिस्कुट एक मेज पर एकत्रित होते रहते हैँ । वहां इन्हें तत्काल ही पैक कर दिया जाता है, क्योंकि यदि खुली हवा में ये कुछ समय भी रखे रहेगे तो नम हो जाता है ।
बिस्कुटों का प्रमुख कच्चामाल तो मैदा ही है, इसके साथ ही चीनी और नमक भी सभी बिस्कुटों में पडते ही हैं । इन्हें फुलाने के लिए खमीर के स्थान पर बेकिंग पाउडर, खाने के सोडे, अमोनिया तथा अंडो का प्रयोग किया जाता है । ताजा अण्डो के स्थान पर प्राय: ही अंडा के सफेद भाग के सूखे पाउडर को पानी में घोलकर प्रयोग करते हैं । यद्यपि दर्जनों प्रकार के बिस्कुट आटोमेटिक प्लाण्ट पर बनाए जा सकते हैँ, परन्तु नए उद्यमी के लिए सबसे अच्छा रहता है ग्लूकोज बिस्कुट तैयार करना । स्वादिष्ट, सस्ते और पौष्टिक होने के कारण ग्लूकोज बिस्कुटों की पर्याप्त मांग तो है ही, इनका अधिक शानदार पैकिंग भी नहीं करना पडता । इन ग्लूकोज बिस्कुटों में ग्लूकोज के पूरक के रुप में मक्का के स्टार्च का प्रयोग होता है और मिश्रण को फुलाने के लिए अण्डो के पाउडर का प्रयोग किया जाता है ।

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