How are made noodles? In Hindi। information on making and selling noodles?

नूडल्स एवं सेवइयाँ(NOODELS)






प्रचार और पैकिंग किस प्रकार एक वस्तु को आधुनिक और विशिष्ट बना देते हैं इसका ज्वलंत उदाहरण है मैगी नूडल्स।
 सेवईयां सदियों से हम भारतीयों का एक प्रमुख खाद्य रहा है, जो अपने आप में पूर्ण भोजन है। हमारे देश के समान ही चीन में भी प्राचीनकाल से सेवइयों का उपयोग होता रहा है, यह बात दूसरी है कि वे इन्हें नूडल्स या चाउमिन कहते हैं और थोडे मोटे रूप में तैयार करते है। सबसे बड़ा अन्तर तो यह है कि हमारे देश में सेवईयां दूध अथवा पानी में पकाकर और शक्कर डालकर खाई जाती हैं जबकि चीन में इन्हें सब्जियों के साथ पकाकर और नमक व मसाले डालकर खाते हैं। चीन देश के यही नूडल्स आज हमारे यहाँ युवा पीढ़ी का सबसे बड़ा क्रेज है और साथ ही सभी चाइनीज़ डिशेज का मूलाधार
भी। सभी अच्छे रेस्टोरेण्ट और फास्ट फूड कार्नर अनिवार्य रूप से चाउमिन और अन्य चाइनीज डिशेज तैयार करते हैं और नगरों में अधिकांश परिवार भी प्रतिदिन नूडल्स बनाते ही
रहते हैं। यही कारण है कि जितनो मात्रा में विशिष्ट आकृति के शानदार पैकिंग में मैगी टाइप नूडल्स बिकते हैं, उससे भी बीस-तीस गुना अधिक बिकते हैं मोटी सेवइयों के रूप में बने हुए सामान्य सीधे नूडल्स।

उद्योग का अर्थशास्त्र एवं मशीनें (Economic Physibility)

शानदार पैकिंग में भरपूर प्रचार के साथ चौकोर टिकियाओं के रूप में बेचे जाने वाले
मैगी टाइप्स नूडल्स हों अथवा सेवइयों के समान सीधे नूडल्स, दोनों की उपयोगिता, स्वाद, कच्चेमाल और निर्माण प्रक्रिया में कोई अन्तर नहीं। परन्तु एक उद्योगपति के दृष्टिकोण से दोनों
में जमीन-आसमान का अन्तर है। चौकोर टिकियाओं के रूप में नूडल्स तैयार करने के लिए एक ड्राइग चेम्बर और मिक्सर तो चाहिए ही, नुडल्स बनाने की विशिष्ट मशीन भी चाहिए। दस लाख रुपए से कुछ अधिक ही है नूडल्स बनाने की इस मशीन का मूल्य और यही कारण है कि इस तरह का प्लांट लगाने और उसे सफलतापूर्वक चलाने के लिए लगभग पचास लाख रुपए चाहिए।
उपभोक्ताओं द्वारा घर पर बनाकर खाए जाने वाले ये नूडल्स किराने की दुकानो (Grossery Shops) पर बिकते हैं और बडी मात्रा में आप इनका उत्पादन करते हैं। यही कारण है कि इस प्रकार के नूडल्स बनाते समय आपको अनेक नगरों में बिक्री व्यवस्था का विस्तृत जाल तो फैलाना ही पड़ेगा, अपने  ब्राण्डनेम का भरपूर प्रचार भी करना होगा। इस रूप में कार्य करते समय जहाँ आपके लाखों रुपए प्रचार और पाउचों के निर्माण में व्यय हो जाते हैं वहीं लाभ प्रतिशत भी बहुत अधिक होता है। परन्तु यदि किसी कारण उद्योग असफल हो जाता है
तो आपका लगभग सम्पूर्ण निवेश ही डूब जाता है, क्योंकि नूडल्स बनाने की यह विशिष्ट मशीन किसी अन्य उद्योग में काम नहीं आती।
इससे ठीक विपरीत स्थिति है पोलीथीन की सामान्य थैलियों में बिकने वाले सामान्य सीधे नूडल्स की। घरों में प्रयोग के लिए इन्हें दाल-मसाले बेचने वाले दुकानदार तो बेचते ही हैं, आप
सीधे होटलो. रेस्टोरेण्टों और कैन्टीनों में भी इन्हें सप्लाई कर सकते है। इस रूप में एक-आध क्विटल प्रतिदिन तक नूडल्स आसानी से तैयार किए जा सकते है, और प्रति किलोग्राम नूडल्स में छ: से दस रुपए तक का शुद्ध मुनाफा तो है ही। इस स्तर पर मैदा गूंधने का काम आप हाथ से कर सकते हैं और इन्हें सुखाने की व्यवस्था किसी भी कमरे में दो तीन गर्म हवा के डोमेस्टिक ब्लोअर्स लगाकर आसानी से की जा सकती है। जहाँ तक इन्हें बनाने की मशीन का प्रश्न है आप
लोहे अथवा लकड़ी की बनी सेवइयाँ बनाने की मशीन का ही प्रयोग करेंगे, जो एक से तीन हजार रुपए के मध्य आसानी से मिल जाती है। जहाँ तक दस-पन्द्रह किलोग्राम नूडल्स प्रतिदिन तैयार करने का प्रश्न है, वे तो घर पर ही दो-ढाई सौ रुपए मूल्य की सेवइयाँ बनाने की घरेलू मशीन पर बनाए और धूप में सुखाए जा सकते हैं। यही कारण है कि पूंजीविहीन और तकनीकी योग्यता से रहित व्यक्तियों के लिए बहुत ही अच्छा गृह उद्योग है इस प्रकार के नूडल्स का निर्माण।

कच्चामाल तथा निर्माण प्रक्रिया (Raw Materials)

स्वचलित मशीन पर चौकोर टिकियाओं के रूप में बड़े स्तर पर नूडल्स का उत्पादन किया जाए अथवा सामान्य सेवइयाँ बनाने की मशीन पर लम्बी सलाइयों जैसे रूप में तैयार किया जाए, निर्माण प्रक्रिया जैसी कोई बात ही नहीं है। मैदा में अन्य गुणवर्द्धक रचकों को मिलाकर सामान्य पानी में इसे गूंधने के बाद इसके छोटे-छोटे पिण्ड बना लिए जाते हैं। मशीन द्वारा इन पिण्डों को नूडल्स के रूप में परिवर्तित करने के बाद ड्राइंग चेम्बर, बिस्कुट सेंकने के छोटे ओवन, गर्म कमरे अथवा धूप में इन्हें सुखा लिया जाता है। सुखाने के पश्चात लम्बे नूडल्स को पोलीथीन की थैलियों में रखकर उनका मुंह तीस-चालीस रुपए मूल्य के सामान्य सीलार (Sealer) से बन्द कर दिया जाता है। इसके विपरीत चौकोर टिकियाओं के रूप में नूडल्स तैयार करने के प्लाण्ट में ये सभी कार्य एक चरणबद्ध श्रृंखला के रूप में स्वयं होते रहते हैं। बिस्कुट औेर ब्रेड के ऑटोमेटिक प्लाण्ट के समान ही चौकोर नूडल्स बनाने के प्लाण्ट में भी मशीनें एक श्रृंखला में सेट की जाती हैं और कन्वेयर बेल्टों से माल एक मशीन से दूसरे मशीन
पर स्वयं जाता रहता है। इस रूप में कुछ करना तो दर वर्करं इन्हें हाथ से छूता भी नहीं।
नूडल्स का प्रमुख कच्चामाल तो गेहूँ की सामान्य मैदा और साधारण पानी ही है। जहा
तक कम मात्रा में प्रयोग किए जाने वाले गुण वर्धक रचकों का प्रश्न है वे भी मात्र तीन-चार ही हैं।
प्रति किलोग्राम मैदा पन्द्रह ग्राम के लगभग कोई भी रिफाइण्ड खाद्य तेल इनमें प्रयूक्त होता है, परन्तु इसे सूखी मैदा में नहीं मिलाते बल्कि गुंथी हुई मैदा के पिण्डों पर चुपड़ा जाता है।
नूडल्स सामान्य सेवइयों की अपेक्षा अधिक चिकने और चमकदार होते हैं। इस प्रयोजन के लिए इनमें कोई रंग अथवा रसायन नहीं, बल्कि सीमित मात्रा में मक्का का स्टार्च अथवा अरारोट मिलाया जाता है। मक्का का स्टार्च, यद्यपि अरारोट की अपेक्षा कुछ महंगा पड़ता है, परन्त इनके स्वाद और पोषक गुणों में पर्याप्त वृद्धि भी कर देता है। इसी प्रकार प्रति किलोग्राम मैदा दस से बीस मिली अण्डे की सफेदी अथवा अण्डों की सफेदी के पाउडर का घोल मैदा गूंथते समय
मिला लेने पर नूडल्स अधिक मुलायम, चिकने और फुसफुसे तैयार होते हैं।
मक्का के स्टार्च, अरारोट, अण्डों की सफेदी या इसके पाउडर के घोल और रिफाइण्ड खाद्य तेल की प्रमुख उपयोगिता नूडल्स को चिकना और चमकदार बनाना तथा पकने के बाद भी उनका अलग-अलग रहना है। नूडल्स के परस्पर न चिपकने और अलग-अलग रहने के समान ही यह भी आवश्यक है कि उन्हें खाते समय इनमें मैदा तथा अन्य रचकों की गंध जरा भी न आए। इस प्रयोजन के लिए अन्य सभी रेडीमेड फूड्स के समान ही नूडल्स की मैदा में भी गूंधते
समय ही वनीला की सुगन्ध मिलाई जाती है। वनीला की इस सुगन्ध का प्रयोजन नूडल्स को सूगन्धित बनाना नहीं बल्कि मैदा, अरारोट और अण्डे की गन्ध को दबाना मात्र है। यही कारण है कि प्रति किलोग्राम मैदा एक ग्राम वनीला पेस्ट अथवा तीन मिली लीटर वनीला एसेन्स मिलाना ही पर्याप्त रहता है।

पैकिंग, सावधानियाँ व बिक्री व्यवस्था (Sales Organization)

शौकीन परिवारों द्वारा प्रयोग किए जाने वाले मैगी टाइप्स नूडल्स तो शानदार पाउचों में ऑटोमेटिक मशीनों पर पैक किए जाते हैं और रेडीमेड फूड्स तथा कास्मेटिक्स के.समान अनेक नगरों में की जाती है इनकी बिक्री व्यवस्था की सेटिंग। इसके विपरीत सीधी आकृति के लम्बे नूडल्स मुख्य रूप से फास्टफूड कार्नरों, रेस्टोरेण्टों, कैण्टीनों और नित्य नूडल्स खाने वाले परिवारों द्वारा प्रयोग किए जाते हैं। यही कारण है कि इनका अधिक लुभावना और महंगा पैकिंग करना अनिवार्य नहीं । सीलन से बचाने के लिए इन्हें पोलीथीन की पतली शीट अथवा सेलोफिन पेपर में लपेटकर और साधारण पोलीथीन की थैलियों अथवा गत्ते के डिब्बों में पैक करके आप आसानी से सप्लाई कर सकते हैं। घरेलू उपभोक्ताओं के लिए आप इन्हें मोमबत्तियों और अगरबत्तियों के समान ही कॉरोगेटेड बोर्ड के डिब्बों में रखकर और उन पर छपा हुआ लेबिल लगाकर प्रयाप्त महंगी दर पर आसानी से दाल-मसाले बेचने वाले दुकानदारों को सप्लाई कर सकते हैं। इनके निर्माण और पैकिंग में बस एक बात की विशेष सावधानी आपको रखनी होगी कि वे टूटे नहीं। यदि आप एक बार सप्लाई की उचित व्यवस्था सेट कर लेते हैं तब न तो आप को बिक्री के लिए अधिक भाग-दौड़ करनी पड़ती है और न ही प्रचार पर कुछ भी खर्च, क्योंकि ये दुकानदार तथा फास्ट फूड कार्नर्स, रेस्टोरेण्ट, कैण्टीनें और होटल आदि आपके परमानेंट ग्राहक बन जाते हैं।


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